शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुखको ।

दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको ।।

हाथ लिए गुडलड्डू सांई सुरवरको ।

महिमा कहे न जाय लागत पद परको ।।


जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मन रमता ।।


अष्टौ सिद्धि दासी प्रमुदित पद लागे ।

ब्रह्मादिक सुर ध्यावत सुर नर मुनि सारे ।।

ऋद्धि सिद्धि चंवर ढुलावें सुर आनंद भरे ।

शंख चक्र गदा पद्म हाथ बिराजे ।।


जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मन रमता ।।


भावभगत से कोई शरणागत आवे ।

संतत संपत सबही भरपूर पावे ।।

ऐसे तुम महाराज विघ्न हरो सब का ।

दास रामा कहे ध्यान धरो चरनन का ।।


जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता ।

धन्य तुम्हारे दर्शन मेरा मन रमता ।।

ही आरती तुमच्या पूजा पोथीत जोडा आणि सलग वाचायह आरती अपनी पूजा पोथी में जोड़ें और क्रमबद्ध पढ़ेंAdd this Aarti to your custom Pooja Pothi to recite sequentially

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